निलावन्ती ग्रंथ क्या है और भारत में बैन क्यों हुआ था
भारत के लाखो लोग जानना चाहते है की निलावन्ती ग्रंथ क्या है और इसमें कौन से रहस्य छुपे है। तो यह एक प्राचीन संस्कृत ग्रंथ है, जिसे पढ़ कर मनुष्य जिव-जंतु की भाषा समझ सकता था। इसी शक्ति के कारण एक सामान्य मनुष्य अलग दुनिया से जुड़ पाता था।
मिली जानकारी अनुसार निलावन्ती ग्रंथ पढ़ने के मुख्य 5 फायदे देखने मिलते है।
- सभी जीवों की भाषा का ज्ञान मिलता है।
- जमीन के निचे का खजाना पाता चलता है।
- तांत्रिक शक्तिया पायी जा सकती है।
- व्यक्ति को वश में करने की जानकारी है।
- ज्योतिष विज्ञानं का विशेष ज्ञान मिलता है।
इन्ही सब लाभ को पाने के लिए लोग ओरिजिनल निलावन्ती ग्रंथ पढ़ना चाहते है। परन्तु आज की तारीख में यह पूरा ग्रंथ कहा है यह किसी को भी नहीं पता। आज हमारे पास असली ग्रंथ के केवल 16 पन्ने ही है।
ब्रिटिश राज में सरकार ने इस ग्रंथ पर प्रतिबंध लगा दिया था। क्यों की देश में कही लोग बता रहे थे की इसे पढ़ने के बाद व्यक्ति की मौत हो जाती है। ब्रिटिश सरकार ने इसे अंधश्रद्धा मानते हुए किताब पर बैन लगा दिया था।
निलावन्ती ग्रंथ क्या है
निलावन्ती एक श्रापित ग्रंथ है, जो मूल रूप से निलावन्ती नाम की एक स्त्री की कहानी पर आधारित है। जिसमे निलावन्ती एक अलग दुनिया से आयी यक्षिणी होती है और वह पृथ्वी लोग में फस जाती है। वो अपने घर जाने का प्रयास और तपस्या करती है।
तभी गाँव के कुछ लोगो ने उस पर झूठे आरोप लगा कर उसकी तपस्या को भांग कर दिया। इसे से गुस्सा हो कर निलावन्ती ने यह ग्रंथ बनाया था। जिसमे समृद्धि पाने का सारा ज्ञान था। लेकिन इसे अधूरा पढ़ने पर इंसान पागल हो जाता था या पूरा पढ़ने पर मर जाता था।
सबसे पहली बार संस्कृत भाषा में निलावन्ती ने कुछ कागज के टुकड़ो में सारी जानकारी लिखी थी। फिर कुछ समय के बाद एक संत को ये कागज मिले थे। उसी संत ने कागज को दुसरो पन्नो में लिख कर एक ग्रंथ बनाया।
निलावन्ती ग्रंथ में मुख्यरूप से निचे बताये विषयो पर ज्ञान दिया है।
- रणनीति: इस भाग में विभिन्न प्रकार के मंत्रों और उनके उपयोगों की चर्चा की गई है।
- भविष्यवाणी: इस भाग में जन्म कुंडली, राशि की स्थिति और भविष्यवाणी के बारे में बताया गया है।
- रोग निवारण: विभिन्न रोगों का निदान और उपचार इस खंड में बताया गया है।
- आयुर्वेदिक: इस भाग में आयुर्वेद के विभिन्न सिद्धांतों और चिकित्सा प्रणालियों की चर्चा की गई है।
- ज्योतिष: इस भाग में वास्तु शास्त्र के कई सिद्धांतों और तरीकों पर चर्चा की गई है।
- आत्मज्ञान: विभिन्न देवताओं और देवी-देवताओं के बारे में इस खंड में बताया गया है।
- समुद्र शास्त्र: इस भाग में सामुद्रिक विज्ञान के विभिन्न नामों पर चर्चा की गई है।
मार्किट में आपको निलावन्ती पर 2 तरह की किताब देखने मिलेगी।
- असली निलावन्ती ग्रंथ
- कहानी वाली किताब
Original Nilavanti Granth को आप हमारे Homepage से डाउनलोड कर सकते है। निलावन्ती की कहानी पढ़नी है तो वो बुक ऑनलाइन अमेज़न वेबसाइट पर मिल जाती है।
क्या निलावन्ती ग्रंथ भारत में बैन है
यह ग्रंथ ब्रिटिश शाशन के समय भारत में बैन किया गया था। ताकि लोगो के बिच गलत अफ़वाए और अंधश्रद्धा को बढ़ावा ना मिले। आजादी के बाद बनी भारत सरकार ने इस पुस्तक को लेकर कुछ भी नहीं कहा है।
अंग्रेजो के दौरान केवल यही बुक नहीं बल्कि 50 से भी ज्यादा किताबे बैन की गयी थी। जिसकी पूरी लिस्ट आप Wikipedia Page पर देख सकते है। लोगो का मानना है इससे व्यक्ति की मृत्यु होती थी, इसलिए किताब पर प्रतिबंध लगाया गया था।
लेकिन असल में ज्यादातर किस्सों में यही देखा गया की जनता की बिच मात्र अफ़वाए फ़ैल रही थी और लोग अंधश्रद्धा का शिकार बन रहे थी। लोगो की बिच अंधश्रद्धा का प्रमाण घटे इसीलिए इसे बंद किया था, किसी की मौत की वजह से नहीं।
ध्यान दीजिये: हमारी वेबसाइट के माध्यम से हम भी आपसे कहेगे की ऐसी अफवाओं का शिकार ना बने। एक्सपर्ट्स की माने तो यह सिर्फ कहानी की किताब है। इसे पढ़ने पर कोई मरता नहीं है।
क्या है निलावन्ती की कहानी
काल को नियंत्रित करने की इच्छा उतनी ही पुरानी है जितनी कि मनुष्य को काल का ज्ञान है। जब से मनुष्य ने काल के रहस्य को जान लिया है, तब से वह उसके साथ चलने की इच्छा पाले हुए है। समय, या काल, वास्तव में बहुत जटिल है। इतिहास इसके साथ कुछ बदल जाता है। लेकिन यह सच है कि अगर आप ऐसा कर पाते तो आप ऐसा नहीं कर पायेंगे क्योंकि अगर आप समय में पीछे हटकर कुछ घटनाओं को बदल देते तो आगे का पूरा इतिहास बदल जायेगा, और आप भी इतिहास के साथ बदल जाएंगे, अर्थात आप इतिहास बदलने के लिये गये यह परिस्थिति ही नहीं होगी।
इसका सीधा अर्थ यह है कि समय बदलने से इतिहास वैसा ही रहता है। उस ग्रंथ का कार्य इस स्थान से शुरू होता है जबकि लोग समय को स्वयं बदल सकते हैं, यह ग्रंथ पढ़ने वाले को यह अधिकार देता है कि वह चाहे तो कुछ भी कर सकता है। वह दूसरों का इतिहास बदल सकता है। लेकिन यह सब बकवास है अब तक किसी ने उस ग्रंथ को अपनी आँखों से नहीं देखा है, सिर्फ उसका नाम और उसके कारनामे सुने हैं।
महाराष्ट्र के किसी भी गाँव में जाकर आप किसी बूढ़े से नीळावंती के बारे में पूछेंगे। साथ ही एक चेतावनी भी दी गई कि उसे पढ़ने से पढ़नेवाले की जाति खत्म हो जाएगी। मुख्य बात यह है कि यह ग्रंथ पढ़ने से पाठक पशु पक्षियों की भाषा समझने लगता है। तांत्रिकों का मानना है कि पशु-पक्षियों का समय मनुष्यों से अलग है।
चींटियों का जीवन कई सालों का हो सकता है, जबकि मनुष्यों का जीवन एक दिन का होता है। दूसरी मान्यता यह है कि समय जितना ही सूक्ष्म है, समय बदल सकता है। जब वह ग्रंथ पाता है और पढ़ने का तरीका जानता है, तो यह सब बाते हैं। वह ग्रंथ किसी भी मानवीय लिपि में नहीं लिखा जा सकता, इसलिए पैशाच लिपी पर लिखा है। पैशाच लिपि को जानने वाला कोई भी जीव नहीं है।
मुख्य बात यह है कि कोई नहीं जानता कि ग्रंथ कैसा है, कहाँ है या कैसे पढ़ाया जा सकता है। लेकिन उस ग्रंथ से क्या लाभ प्राप्त हो सकता है यह जानने से ही कोई भी उसे खोजने के लिए प्रेरित हो जाता है, खासकर कोई भी जिसे किसी अद्भुत काम में बहुत दिलचस्पी होती है।
आशा करता हु निलावन्ती ग्रंथ क्या है इसका जवाब आपको मिल चूका है। जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अन्य लोगो के साथ भी जरूर शेयर करे।